Mithila BhumiMithila Bhumiमिथिला भूमि

संस्कृति

संस्कृति एवं समुदाय

वे साझा परंपराएँ जो मिथिला और कोसी के हर समुदाय को जोड़ती हैं।

Chhath Puja
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Sama-Chakeva
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Durga Puja
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Makhana
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Sama-Chakeva
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प्रमुख पर्व

छठ पूजा

सूर्य उपासना का महापर्व, तालाबों और नदी घाटों पर अर्घ्य।

सामा-चकेवा

भाई-बहन के प्रेम का शीतकालीन पर्व, मिट्टी की मूर्तियाँ और लोकगीत।

मधुश्रावणी

नवविवाहिताओं का श्रावण पर्व — कथा, गीत और कोहबर कला।

जुड़ शीतल

मैथिल नववर्ष — बड़ों का आशीर्वाद, बासी भात और पेड़ों को जल।

कोजागरा

शरद पूर्णिमा पर नवविवाहित वर का उत्सव, मखाना और पान का वितरण।

चौरचन

भादो में चंद्रमा की पूजा, दही और पकवानों के साथ।

जीवन एवं परंपरा

लोकगीत

सोहर, समदाउन, बटगमनी, नचारी और विद्यापति गीत।

मिथिला व्यंजन

दही-चूड़ा, माछ-भात, मखाना खीर, तिलकोर तरुआ और ठेकुआ।

पाग एवं परिधान

पाग — मिथिला की सांस्कृतिक पहचान (वर के लिए लाल पाग), धोती-कुर्ता और लाल-पीली साड़ी।

विवाह परंपरा

सौराठ सभा, कोहबर, चतुर्थी और चार दिन चलने वाले मैथिल विवाह संस्कार।

आतिथ्य

पान, मखान और पाग से अतिथि का सम्मान — 'पग-पग पोखरि माछ मखान'।

लोकनृत्य एवं नाट्य

झिझिया, जट-जटिन, डोमकच और कोसी क्षेत्र की भगैत गायन परंपरा।