विरासत
मिथिलांचल की विरासत एवं समुदाय
सभी समुदायों का सम्मानपूर्ण, संतुलित प्रतिनिधित्व — इतिहास, परंपरा और लोकविश्वास को अलग-अलग पहचानते हुए।



प्राचीन विदेह
राजा जनक का विदेह राज्य, माता सीता की जन्मभूमि और उपनिषदों के ज्ञान-संवाद की भूमि।
मैथिली भाषा
संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल; तिरहुता (मिथिलाक्षर) इसकी पारंपरिक लिपि है।
महाकवि विद्यापति
14वीं–15वीं सदी के 'मैथिल कोकिल', जिनके गीत आज भी हर शुभ अवसर पर गाए जाते हैं।
दर्शन एवं विद्वत्ता
गंगेश उपाध्याय का नव्य-न्याय, वाचस्पति मिश्र, मंडन मिश्र और अयाची मिश्र जैसे विद्वान।
मैथिल राजपूत विरासत
मिथिला में रहने वाला हर परिवार मैथिल है। मैथिल राजपूतों में गन्धवरिया राजपूत मुख्य हैं, और कछवाहा, तोमर, राठौर, चौहान, किनवार, बिसेन, चंदेल इत्यादि अन्य राजपूत भी मैथिल राजपूत में शामिल हैं — ड्योढ़ी परंपरा, शौर्य और सामुदायिक नेतृत्व के साथ।
मैथिल संस्कार
मुख्य संस्कार: मुंडन, उपनयन, छठी (जातकर्म), बरही (नामकरण), अन्नप्राशन और श्राद्ध संस्कार।
मुख्य मैथिल पर्व
मधुश्रावणी, जुड़ शीतल, कोजगरा, सामा-चकेवा, बरसाइत, सप्ता-डोरा, भरदुतिया, फगुआ, दुर्गा पूजा, काली पूजा, छठ पूजा, देवउठान, श्री पंचमी, विवाह पंचमी, नवान्न पाबनि इत्यादि।
मैथिल ब्राह्मण परंपरा
संस्कृत अध्ययन, पंजी प्रथा, कर्मकांड और विद्वत् परंपरा।
सभी समुदाय
किसान, कारीगर, मछुआरे, व्यापारी और सभी परिवार जिनके श्रम से मिथिला बनी है।
दरभंगा राज
खंडवाला वंश का दरभंगा राज — शिक्षा, संगीत और कला का बड़ा संरक्षक।
कोसी — बिहार का शोक व जीवनदायिनी
कोसी नदी ने इस क्षेत्र की मिट्टी, खेती और संस्कृति को गढ़ा है।