Mithila BhumiMithila Bhumiमिथिला भूमि

पंचमहल · बिहार

पंचमहल — हमारी जड़ें, हमारी विरासत

बिहार के कोसी क्षेत्र में बसा पंचमहल गाँव — बरैल, बरुआरी, पंचगछिया और परसरमा के पड़ोस में — मिथिला भूमि का हृदय।

गाँव का परिचय-पत्र

नाम
पंचमहल
राज्य / अंचल
बिहार · कोसी प्रमंडल, मिथिलांचल
ज़िला
सुपौल / सहरसा क्षेत्र *
पड़ोसी गाँव
बरैल, बरुआरी (गढ़ बरुआरी), पंचगछिया, परसरमा
भाषा
मैथिली (हिंदी भी प्रचलित)
नदी / भूगोल
कोसी के उपजाऊ जलोढ़ मैदान, पोखर और चौर
आजीविका
धान, गेहूँ, मक्का, मखाना, पशुपालन; बड़ी संख्या में प्रवासी
प्रमुख धाम (पास)
बाबा कपिलेश्वर महादेव, दस महाविद्या मंदिर (गढ़ बरुआरी), दयोढ़ी दरबार दुर्गापुर (पंचगछिया)
ड्योढ़ियाँ
बरुआरी ड्योढ़ी, सुखपुर ड्योढ़ी, जदिया मानगंज ड्योढ़ी, परसरमा ड्योढ़ी, बरैल ड्योढ़ी, पंचगछिया ड्योढ़ी
वंश परंपरा
सोनवर्षा राज काली सिंह के वंशज; बरुआरी ड्योढ़ी — निसंग सिंह के वंशज
समुदाय
मैथिल राजपूत (गन्धवरिया मुख्य) — मिथिला में रहने वाला हर परिवार मैथिल
प्रमुख पर्व
मधुश्रावणी, जुड़ शीतल, कोजगरा, सामा-चकेवा, बरसाइत, सप्ता-डोरा, भरदुतिया, फगुआ, दुर्गा पूजा, काली पूजा, छठ, देवउठान, श्री पंचमी, विवाह पंचमी, नवान्न
मुख्य संस्कार
मुंडन, उपनयन, छठी (जातकर्म), बरही (नामकरण), अन्नप्राशन, श्राद्ध
रेल
सहरसा जंक्शन (SHC), सुपौल स्टेशन
हवाई अड्डा
दरभंगा (DBR)
जनसंख्या / पिन कोड
पुष्टि हेतु लंबित *
Paddy fields of the Kosi-Mithila plains
© Suyash.dwivedi · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons

* चिह्नित विवरण ग्रामवासियों से पुष्टि हेतु लंबित हैं — सुधार नीचे भेजें।

विशेष उल्लेख

ड्योढ़ी दरबार — पंचमहल की शान

‘ड्योढ़ी’ मिथिला में राजपूत ज़मींदार परिवारों के ऐतिहासिक निवास-द्वार और दरबार को कहते हैं। पंचमहल की ड्योढ़ियाँ गंधवरिया (मैथिल) राजपूतों के सोनबरसा राज की शाखाएँ हैं — जहाँ से न्याय, पूजा, पर्व और गाँव का जीवन चलता था।

बरुआरी ड्योढ़ी

निसंग सिंह के वंशज। यहीं राजा की ड्योढ़ी में माँ दुर्गा की पूजा आरंभ हुई।

पंचगछिया ड्योढ़ी (दुर्गापुर)

सोनबरसा राज के काली सिंह के वंशज; स्वतंत्रता संग्राम की धरती।

सुखपुर ड्योढ़ी

पंचमहल की प्रमुख ड्योढ़ियों में एक; इतिहास में 'सोखपुर' नाम से गंधवरिया ज़मींदारों की बस्ती के रूप में दर्ज।

जदिया मानगंज ड्योढ़ी

सुखपुर के साथ जुड़ी परंपरा; 'जदिया' भी गंधवरिया ज़मींदारों की बस्तियों में गिना जाता है।

परसरमा ड्योढ़ी

गंधवरिया राजपूत ज़मींदारों की ड्योढ़ी।

बरैल ड्योढ़ी

सोनबरसा राज से जुड़ी गंधवरिया शाखा; 1803 में स्व. काशी दत्त सिंह ने यहाँ दुर्गा मंदिर स्थापित किया।

“पंचगछिया ड्योढ़ी और सोनबरसा राज — हम लोग काली सिंह के वंशज हैं; बरुआरी ड्योढ़ी सब निसंग सिंह के।”

— ड्योढ़ी परिवार की ओर से साझा

इतिहास की झलक

    14वीं सदी

    ज्योतिरीश्वर ठाकुर के 'वर्णरत्नाकर' में गंधवरिया राजपूतों का उल्लेख — उत्तर बिहार के बड़े भाग पर उनका प्रभाव।

    1654

    मुग़ल फ़रमान से राजा रणजीत सिंह ने सोनबरसा राज की स्थापना की — गंधवरिया राजपूत वंश, मुग़ल काल में सरकार तिरहुत के प्रमुख राजा।

    17वीं सदी

    बरुआरी में तांत्रिक पद्धति से माँ दुर्गा की स्थापना; पूजा पहले राजा की ड्योढ़ी में निजी रूप से होती थी।

    1803

    बरैल में स्व. काशी दत्त सिंह द्वारा दुर्गा मंदिर की स्थापना — आज भी शक्ति उपासना का केंद्र।

    15 Jan 1934

    भूकंप के बाद महात्मा गांधी पंचगछिया आए; नारायणी संस्कृत टोल की सभा में महिलाओं ने आज़ादी के लिए अपने गहने दान किए।

    1962

    राजा भूपेंद्र नारायण सिंह के निधन के बाद बरुआरी की दुर्गा पूजा पूरे गाँव की सामूहिक पूजा बन गई।

स्रोत: ड्योढ़ी परिवार की जानकारी; विकिपीडिया (सोनबरसा राज, गंधवरिया); हिन्दुस्तान व एबीपी (बरुआरी दुर्गा मंदिर); प्रभात ख़बर (गांधी जी का पंचगछिया आगमन)। सुधार हेतु लिखें: pranam@mithilabhumi.com

कोसी अंचल की झलक

Chhath at a pond
© M27SHRA · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
Makhana
© FacetsOfNonStickPans · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
Kosi river
© Mayank Bhagya · CC BY 2.0 · Wikimedia Commons
Sama-Chakeva
© Shivendujha · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
Supaul station
© Skrsingh009 · CC0 · Wikimedia Commons

पंचमहल एवं पड़ोसी गाँव

भौगोलिक स्थिति

पंचमहल बिहार के कोसी क्षेत्र में स्थित है, सहरसा ज़िले के आसपास, कोसी नदी के उपजाऊ मैदानों में।

गाँव का जीवन

धान, गेहूँ, मक्का और मखाना की खेती, पोखर, आम के बगीचे और संयुक्त परिवारों की परंपरा।

पर्व एवं परंपराएँ

छठ, दुर्गा पूजा, सामा-चकेवा, जुड़ शीतल, होली और मधुश्रावणी धूमधाम से मनाए जाते हैं।

आसपास के धाम

उग्रतारा स्थान (महिषी), मत्स्यगंधा मंदिर (सहरसा) और सिंहेश्वर स्थान (मधेपुरा) निकट हैं।

कैसे पहुँचें

निकटतम बड़ा रेलवे स्टेशन सहरसा जंक्शन; पंचगछिया होकर सड़क मार्ग। निकटतम हवाई अड्डा दरभंगा।

स्मृतियाँ एवं मौखिक इतिहास

बुज़ुर्गों की कहानियाँ और पुरानी तस्वीरें — नीचे दिए फ़ॉर्म से साझा करें।

अपनी कहानी साझा करें

सामुदायिक योगदान