
दस महाविद्याओं में से एक माँ छिन्नमस्तिका को समर्पित प्राचीन मंदिर, खुरहान की दक्षिण काली मंदिर से लगभग 200 गज उत्तर। मान्यता है कि शाम 6 बजे के बाद माँ भ्रमण करती हैं, इसलिए उसके बाद मंदिर में प्रवेश नहीं होता। प्रांगण के कुएँ का जल निसंतान महिलाएँ प्रसाद रूप में ग्रहण करती हैं; मनोकामना पूरी होने पर यहीं मुंडन होता है।
कैसे पहुँचें
आलमनगर–बुधमा रोड, खुरहान; आलमनगर से बस या निजी वाहन (रेल सुविधा नहीं)। दर्शन सुबह 6 से शाम 6 बजे तक।
क्या पहनें
शालीन, कंधे ढके कपड़े; गर्भगृह में जूते-चप्पल बाहर उतारें।
क्या खाएँ
मिथिला का माछ-भात, मखाना खीर, दही-चूड़ा, तिलकोर और ठेकुआ चखें।
कहाँ ठहरें
ज़िला मुख्यालय के होटल या गाँव के घर में होमस्टे — हम व्यवस्था करा सकते हैं।
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