
17वीं सदी के गौ-सेवक संत, पशुपालकों के लोक देवता। गाय-भैंस का पहला दूध यहीं चढ़ता है; दूध की धारा कोसी में मिलती है।
कैसे पहुँचें
सहरसा बस स्टैंड से लगभग 20 किमी पश्चिम, महिषी प्रखंड से 2 किमी
क्या पहनें
शालीन, कंधे ढके कपड़े; गर्भगृह में जूते-चप्पल बाहर उतारें।
क्या खाएँ
मिथिला का माछ-भात, मखाना खीर, दही-चूड़ा, तिलकोर और ठेकुआ चखें।
कहाँ ठहरें
ज़िला मुख्यालय के होटल या गाँव के घर में होमस्टे — हम व्यवस्था करा सकते हैं।
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